HAMARI NAITIKTA
हमारी सरकार कहती है शिक्षा जरुरी है . मगर बच्चो का शोसन इनकी मज़बूरी है . मैंने देखा एक बच्चा बेच रहा था अखबार वर्दी धारी ने कर दिया उसका एक पेपर बेकार . गुस्से से बच्चे ने उसकी तरफ देखा था पर लाचार होकर गस्से को फेका था . जनवरी का जाड़ा था , कपडा भी फटा था लेकिन पेपर लेकर वो स्टेशन पे डटा था . वर्दीवाले सुन्दर थे स्वस्थ भी अच्छा था पपेरवाला गरीब था ,मासूम था ,बच्चा था . वर्दी का पीछा किया सोचा कि उसे रोकू मगर मेरी औकात क्या कैसे वर्दी को तोकू . उसके पास वर्दी है ,स्वस्थ है,सरकार है एक तरफ कवि है, कमजोर है,बेरोजगार है . बाते अच्छी करते है ,प्रयोग में उतारते नहीं गलत करने वाले को शब्दों से भी मारते नहीं . यही हमारे नागरिक है,ऐसी ही सरकार है सोच तो अच्छा है पर व्यक्तित्व में विकार है ...
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