bachan ki soch

वो दिन 
जब मै छत पर
एक मेज पर बैठा 
सोच रहा था 
कि

पहले मै बीए  करुगा 
फिर ऍम ए 
फिर आइ ऐ यस बनुगा 
तथा समाज की सारे बुराइया
ख़तम कर दुगा .

और आज का दिन 
जब मैंने बीए भी कर लिया है 
एम भी पास हू 
फिर भी दुनिया देख कर 
और  न् बदल पाने के कारन 
बहुत उदाश हू .

मैंने नहीं सोचा था 
जब तक मै बुराइया ख़तम करने योग्य  होउगा
तब तक 
कुछ लोग बुरा करने वाले भी
पैदा हो जाएगे .

और
शायद बुराई की जो परिभाषा है 
जिससे सरीफ लोगो को बड़ी आशा है 
बदल कर मेरी निराशा बन जाएगी 
और मुझे खुद 
बुरा बन्ने पर मजबूर कर देगी 
तथा मेरे बचपन की सोच को 
मुझसे बहुत दूर कर देगी ...

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